पार्वती घाटी के वो रहस्य जो आपको रात के अंधेरे में भी साफ-साफ दिखाई देंगे

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Photo of पार्वती घाटी के वो रहस्य जो आपको रात के अंधेरे में भी साफ-साफ दिखाई देंगे by Rishabh Dev

हिमाचल प्रदेश पर्यटकों के लिए हमेशा से ही आकर्षण का केन्द्र रहा है। अगर आप बर्फ की तलाश में हैं और एडवेंचर करना चाहते हैं तो हिमचाल आपके लिए मुफीद जगह है। हिमाचल प्रदेश युवाओं का पंसदीदा हाॅलिडे डेस्टिनेशन है, खूबसूरती से भरे इस प्रदेश में एक जगह है जहां हिमाचल का जादू अपने रंग में होता है, पार्वती घाटी।

पार्वती घाटी भारत के एम्सटर्डम के रूप में अपनी जगह बना चुका है। पार्वती घाटी अपने जंगल और चरस की खेती के लिए पहले से प्रसिद्ध है। ये तो यहां की जानी-पहचानी, पहचान है लेकिन क्या आपको ये पता है कि इन सबके अलावा, पार्वती घाटी अपनी पौराणिक कथाओं और लोक कथाओं के लिए भी जानी जाती है। यहां के कई स्थान ऐसे हैं जहां के बारे में कहा जाता है कि वहां भगवान आते-रहते हैं। ऐसे ही कई रहस्य लेकर बैठी इस पार्वती घाटी के बारे में हम आपके लिए कुछ दिलचस्प जानकारी लेकर आए हैं।

इसे ‘पार्वती घाटी’ क्यों कहा जाता है?

ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव ने यहां लगभग 3,000 वर्षों तक रहस्यमय तरीके से पार्वती घाटी में ध्यान किया था। वो यहां सन्यासी नागा साधु के रूप में ध्यान करते थे। कई सीजन आये और गये भी लेकिन भगवान शिव अपनी तपस्या में लीन रहे। एक दिन उसने इस अछूते, सुंदर और पूरी तरह से गढ़े हुए सुंदर परिदृश्य को देखा और उन्होंने इस जगह का नाम अपनी पत्नी के नाम पर रख दिया, पार्वती।

मणिकरण की कहानी

मणिकरण पार्वती घाटी में पार्वती नदी और व्यास नदी के बीच में बसा हुआ है। इस जगह खूब बर्फ पड़ती है, जिसकी वजह से यह पर्यटकों के आकर्षण का बड़ा केन्द्र है। लेकिन इस जगह के नाम की दिलचस्प कहानी है। जब पार्वती घाटी में भगवान शिव और देवी पार्वती रह रहीं थी, एक दिन पानी पीते समय देवी पार्वती की कीमती मणि पानी में चली गई। काफी खोज के बाद भी जब देवी पार्वती को मणि नहीं मिली, तब वो दुःखी हो गईं। उन्होंने भगवान शिव को उसे लाने के लिए कहा।

भगवान शिव ने अपने सेवक को देवी पार्वती के मणि को खोजने की आज्ञा दी। जब वो सेवक मणि को ढ़ूढ़ने में असफल रहा, तो भगवान शिव को क्रोध आ गया और उन्होंने अपनी तीसरी आंख खोल दी। भगवान शिव के इस क्रोध से पूरे ब्रह्मांड में हाहाकर मचने लगी और और तबाही होने लगी। भगवान शिव के क्रोध को शांत करने के लिए सभी देवी-देवता सर्प देवता, शेषनाग के पास गये और समस्त ब्रह्मांड को बचाने की अपील की। शेषनाग ने एक फुफकार मारी जिससे उबलते पानी का प्रवाह बढ़ गया। पूरे इलाके में पानी फैल गया जिससे देवी पार्वती के जैसे ही कीमती पत्थरों की उत्पत्ति हुई। इसी पौराणिक कहानी से इस जगह का नाम मणिकरण पड़ गया।

मणिकरण में गुरु नानक की यात्रा

सिख विद्वानों का कहना है तीसरी सदी के दौरान सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक अपने शिष्य भाई मर्दाना के साथ यहां आए थे। गुरू नानक के शिष्य मर्दाना को भूख लगी, लेकिन उनके पास भोजन नहीं था। गुरु नानक ने मर्दाना को लंगर से आटा लाने के लिए भेजा। मर्दाना को आटा मिल गया, रोटी भी बनने लगी लेकिन रोटियों को सेंकने के लिए आग का इंतजाम नहीं हुआ था। तब गुरु नानक ने मर्दाना को एक पत्थर उठाने के लिए कहा लेकिन तभी उन्हें पास में ही एक गर्म पानी का झरना दिखाई दिया।

गुरु नानक ने मर्दाना को गर्म पानी के झरने में रोटियों को डालने के लिए कहा। मर्दाना ने रोटी झरने में डाल दी लेकिन उनके हाथ निराशा लगी क्योंकि सारी रोटियां पानी में डूब गईं। गुरु नानक ने भगवान से प्रार्थना करते हुए कहा, अगर उनकी रोटियां वापस तैरने लगती हैं तो वे उनके नाम पर वे एक रोटी दान करेंगे। गुरू नानक की प्रार्थना पर सभी रोटियां उस झरने के पानी पर तैरने लगीं। तब गुरु नानक ने बताया कि जो कोई भी भगवान के नाम पर दान करता है, उन्हें कुछ न कुछ वापस मिल ही जाएगा।

खीरगंगा की कहानी

युगों साल पहले, भगवान शिव और पार्वती के छोटे बेटे कार्तिकेय ने एक हजार साल तक यहां ध्यान किया था। इस जगह के बारे में किंवदंतियां हैं कि जब कार्तिकेय यहां थे, तब भगवान शिव और देवी पार्वती कभी-कभार उन्हें देखने आते थे। देवी पार्वती अपने बेटे के जिए यहीं पर खीर बनाती थीं और इसी वजह से पार्वती नदी का रंग हरा है।

द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ मलाणा

एक लोकप्रिय धारणाा है कि मलाणा गांव के कुछ लोगों को सिकंदर महान के निर्वासित ग्रीक सैनिकों के वंशज हैं। इस धारणा के बावजूद इन लोगों का अस्तित्व हिंदू धर्म की पौराणिक कथाओं में है। ये लोग अपने देवता जमलू ऋषि को मानते हैं और उनकी पूजा करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि एक बार पुराणों के ऋषि ने इस जगह को रहने योग्य बनाया और लोकतंत्र की नींव रखी। जो अभी तक पूरी तरह से संसदीय प्रणाली के रूप में काम कर रही है।

पार्वती घाटी अपने में सुंदरता समेटे हुए है और ऐसे ही रहस्मयी कहानियां लेकर बैठी है। यहां बर्फ भी है और उबलता हुआ पानी। यहां आकर आपका मन न सुंदरता से भरेगा और न ही इन दिलचस्प किदवंतियों से। अगर आप घूमने के लिए हिमाचल प्रदेश आने की सोच रहे हैं तो पार्वती घाटी जरूर आईए और इन रहस्मयी स्थानों को अपनी आंखों से देखिए।

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