कन्नौज: यूपी का वो शहर जहाँ की गलियों में इतिहास आज भी जिंदा है

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Photo of कन्नौज: यूपी का वो शहर जहाँ की गलियों में इतिहास आज भी जिंदा है by Deeksha Agrawal

भारत के हर शहर में एक कहानी बस्ती है जो अपने आप में उपन्यास तरह होती है। वो शहर किस तरह कहाँ से शुरू हुआ और कैसी परिस्थितियों से गुज़रा। ये सब उस कहानी में लिखा होता है। लेकिन भारत में आज भी कुछ शहर ऐसे हैं जिनके किस्से पूरी तरह से नहीं सुने गए हैं। वो शहर कैसे और कब बने और उनके होने तक जाने वाले रास्ते पर ऐसा हुआ कि आज उनकी तस्वीर पूरी तरह से बदल चुकी है। ऐसे बहुत से सवाल हैं जिनके जवाबों के लिए इन शहरों में भटकना ज़रूरी लगता है। कन्नौज भी इनमें से एक है।

कन्नौज की खासियत

गंगा नदी के किनारे बसा ये शहर इत्र के उत्पादन के लिए मशहूर है। यहाँ कई कारखाने ऐसे हैं जहाँ आज भी सालों पुराने तरीकों को इस्तेमाल करके इत्र बनाया जाता है और इसी वजह से दुनियाभर में कन्नौज की अपनी एक अलग पहचान है। कन्नौज को भारत का परफ्यूम कैपिटल यानी इत्र की नगरी के नाम से भी जाना जाता है। केवल यही नहीं इतिहास में भी कन्नौज का काफ़ी महत्व रहा है। कन्नौज उन चुनिंदा शहरों में से है जिसने भारत में कला और संस्कृति के शुरुआती दिन देखे हैं। भारत में कला और कल्चर की लोकप्रियता में इस शहर की ख़ास भागीदारी रही है। कन्नौज में पौराणिक कथाओं का भी बहुत साथ रहा है क्योंकि रामायण और महाभारत में भी इसका ज़िक्र हुआ है। इसमें कोई शक नहीं है कि ये प्राचीन शहर 1200 ईसा पूर्व के ज़माने में भी इतना ही गुलज़ार रहा करता होगा जितना आज के समय में है। कन्नौज में आपको अगर मिट्टी के बर्तनों में खाना परोसा जाए तो चौंकिएगा नहीं। कन्नौज में टैराकोटा से बनी चीजें और प्राचीन सिक्कों का मिलना बहुत आम बात है। यहाँ मौर्य और गुप्ता वंश के समय की चीज़ों को भी देखा जा सकता है। कुल मिलाकर अगर आप भी समय में वापस कदम रखना चाहते हैं तो आपको बेशक कन्नौज की यात्रा करनी चाहिए।

क्या देखें?

1. इत्र के कारखाने

उत्तर प्रदेश का कन्नौज शहर अपने इत्र के कारखानों और दुकानों के लिए जाना जाता है। यहाँ की लगभग हर गली में आपको इत्र की खुशबू मिलेगी। कन्नौज के मुख्य बाज़ार में ऐसी कई पुरानी दुकानें हैं जहाँ कांच की शीशियों में इत्र मिलता है। इन शीशियों में वो इत्र होता है जिसके लिए कन्नौज फेमस है। इन दुकानों में आपको चौंकाने वाली खुशबू भी मिल सकती है। चंदन से लेकर गुलाब की खुशबू तक ऐसा शायद ही कोई इत्र होगा जो कन्नौज की इन गलियों में ना मिले। इसके अलावा यहाँ मिट्टी और बारिश की खुशबू वाले इत्र भी मिलते हैं। कहते हैं कन्नौज की इन पुरानी दुकानों में मुगल साम्राज्य के समय पर इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक से इत्र बनाया जाता है। अगर किस्मत अच्छी रही तो इनमें से कुछ दुकानों और कारखानों में आप इत्र को बनते हुए भी देख सकते हैं। इत्र को बनते देखना एक ऐसा अनुभव है जिसे आपको बिल्कुल भी मिस नहीं करना चाहिए।

2. आर्कोलॉजिकल म्यूज़ियम

श्रेय :फेसबुक।

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कहते हैं इतिहास को संजोने के लिए संग्रहालय सबसे बढ़िया जगह होती है। कन्नौज की खूबसूरत गलियों में घूमने के बाद आपको यहाँ के म्यूज़ियम देखने चाहिए जहाँ इस शहर का इतिहास सहेजा गया है। कन्नौज के पुरातत्व म्यूज़ियम में कई तरह की मिट्टी की मूर्तियाँ हैं जिन्हें आपको देखना चाहिए। इन मूर्तियों को देखकर एक बात बिल्कुल साफ़ पता चलती है। उत्तर प्रदेश के बाकी शहरों की तरह कन्नौज में भी कला और संस्कृति का बहुत महत्व था। मौर्य युग से ही ये शहर पूरी तरह से विकसित था। यहाँ के सभी मॉडलों को देखकर आप समझ जाएँगे कि पुराने समय में ये शहर कितना प्रगतिशील जिला रहा होगा। यहाँ तक की फेमस चाइनीज़ ट्रैवलर ह्वेन सांग ने भी अपनी भारत यात्रा में कन्नौज का ज़िक्र किया है।

3. लाख बहोसी बर्ड सैंक्चुरी

भारत की सबसे बड़ी बर्ड सैंक्चुरी में से एक, लाख बहोसी बर्ड सैंक्चुरी केवल कन्नौज ही नहीं बल्कि पूरे भारत का गौरव है। सैंक्चुरी में ऐसी कई तरह के पक्षी हैं जिन्हें देखकर आपको आश्चर्य होगा। यहाँ कुछ ऐसे पक्षी भी हैं जो आपके अंदर बैठे जिज्ञासु को जगा देगा। यदि आप सर्दियों के मौसम में यात्रा कर रहे हैं तो आपको दुनिया भर के राजसी प्रवासी पक्षियों को देखने का मौका मिलेगा। अगर आपको फ़ोटोग्राफी करने का शौक है तो इससे बेहतर जगह और कोई नहीं।

4. धार्मिक स्थल

श्रेय: इंडियन हॉलिडे।

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भारत में मंदिरों की कमी नहीं है और ऐसा ही कन्नौज में भी है। कन्नौज में ऐसे बहुत से मंदिर है जिन्हें आपको ज़रूर देख लेना चाहिए। इनमें सबसे ख़ास है कन्नौज का सिद्धेश्वर नाथ मंदिर। गंगा नदी के किनारे बसा ये मंदिर लगभग 500 साल पुराना है। अक्टूबर के महीने में इस मंदिर में ख़ास भीड़ होती है। साल के इस समय यहाँ फेस्टिवल जैसा माहौल होता है। हिन्दू धर्म में गंगा को पवित्र नदी माना गया है इसलिए अगर आपका इस मंदिर में आना हो तो आपको आरती ज़रूर करनी चाहिए और आप यहाँ डुबकी भी लगा सकते हैं। इसके अलावा आप माता अन्नपूर्णा मंदिर भी देख सकते हैं।

क्या खाएं?

कन्नौज में अवधि और मुगलई खाने का ख़ास प्रचलन है। यहाँ कई ऐसे रेस्त्रां हैं जहाँ आप पारंपरिक मुगलई खाने का मज़ा उठा सकते हैं। इसके अलावा कन्नौज में दाल और चने से बने पकवान को बड़े चाव से खाया जाता है। यहाँ आप बेदमी पूरी, सागपिटा, गुदंबा जैसे चीज़ों का स्वाद ले सकते हैं। कन्नौज के बड़े बाज़ार में आप इन सभी क्विजीन को खा सकते हैं।

कैसे पहुँचें?

फ़्लाइट से: अगर आप प्लेन से कन्नौज आना चाहते हैं तो कानपुर एयरपोर्ट सबसे नज़दीकी एयरपोर्ट है। कानपुर आने के लिए लगभग सभी शहरों से आसानी से फ़्लाइट मिल जाती हैं। कानपुर से कन्नौज 84 किमी. दूर है और इस रास्ते को तय करने में लगभग 3 घंटों का समय लगता है। कानपुर से आप बस या टैक्सी लेकर कन्नौज पहुँच सकते हैं।

ट्रेन से: ट्रेन से आने के लिए कन्नौज रेलवे स्टेशन ही सबसे नज़दीकी स्टेशन है। अगर आप दिल्ली से आए रहे हैं तो आपके पास ट्रेनों के 2 विकल्प हैं। दिल्ली से कन्नौज की दूरी 435 किमी. है जिसमें 7 घंटे लगते हैं।

रोड से: कन्नौज देश से बाकी शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुए है इसलिए यहाँ आने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। अगर आप दिल्ली से कन्नौज आ रहे हैं तो आप नेशनल हाईवे 234 और स्टेट हाईवे 21 के रास्ते कन्नौज आ सकते हैं।

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